शाकद्वीप : सौर संस्कृति और मग परंपरा
सत्येन्द्र कुमार पाठक
प्राचीन भारतीय वांग्मय और पुराणों (विष्णु, भागवत, और साम्ब पुराण) के अनुसार, पृथ्वी सात द्वीपों में विभक्त है। इनमें 'जम्बूद्वीप' के बाद 'शाकद्वीप' का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। यह द्वीप न केवल अपनी प्राकृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह विश्व की 'सौर उपासना' (Sun Worship) का मूल केंद्र भी है। मगध की धरती और शाकद्वीप का संबंध अटूट है, जिसने बिहार और उत्तर भारत के सामाजिक-धार्मिक ढांचे को एक नई दिशा दी। शाकद्वीप का भूगोल और संस्थापक - शाकद्वीप का अस्तित्व पौराणिक काल से ही एक दिव्य और ज्ञान संपन्न भूमि के रूप में रहा है। ब्रह्म की के मानस पौत्र प्रथम मनु स्वायंभुव मनु के जेष्ठ पुत्र : महाराज प्रियव्रत ने अपनी वृद्धावस्था में पृथ्वी को सात पुत्रों में बांटा। उनके पुत्र भव्य शाकद्वीप के प्रथम शासक बने। भव्य ने इस द्वीप को सात वर्षों (क्षेत्रों) में विभाजित किया, जो उनके सात पुत्रों (जलद, कुमार, सुकुमार, मणीचक, कुसुमोद, मोदाक और महाद्रुम) के नाम पर प्रसिद्ध हुए।।शाक वृक्ष की महिमा: इस द्वीप के मध्य में एक विशाल 'शाक' (सागौन) का वृक्ष है, जिसकी सुगंध से संपूर्ण द्वीप महकता है। इसी वृक्ष के नाम पर इसका नाम 'शाकद्वीप' पड़ा।।शाकद्वीप की व्यवस्था वैज्ञानिक और अनुशासित थी, किंतु यहाँ के वर्णों के नाम विशिष्ट थे:।चतुर्वर्ण व्यवस्था: में मघ (मग): ये वे ब्राह्मण थे जो सूर्य की उपासना और वेदों के पठन-पाठन में लीन रहते थे। मागध: क्षत्रिय वर्ण, जो शासन और सुरक्षा का दायित्व संभालते थे। मानस: वैश्य वर्ण, जो व्यापार और कृषि कर्म में कुशल थे। मन्दग: शूद्र वर्ण, जो सेवा कार्य में संलग्न थे।।शाकद्वीप की पवित्र नदियां में सुकुमारी, कुमारी, नलिनी, धेनुका, इक्षु, वेणुका और गभस्ती है। इन नदियों का जल अमृत तुल्य माना गया है। शाकद्वीप था कुलपर्वत: उदयगिरि, जलाधार, रैवतक, श्याम, अस्तगिरि, आम्बिकेय और केसरी है।। ये पर्वत आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र माने जाते हैं। सौर धर्म और मग ब्राह्मणों का भारत आगमन -शाकद्वीप के मुख्य देवता भगवान सूर्य (सविता) हैं। यहाँ सौर धर्म का पूर्णतः पालन होता था।।साम्ब और सूर्य उपासना: पौराणिक कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को दुर्वासा ऋषि के श्राप से कुष्ठ रोग हो गया था। चंद्रभागा नदी के तट पर उन्होंने सूर्य की कठोर तपस्या की। सूर्य देव ने उन्हें दर्शन देकर बताया कि शाकद्वीप से 'मघ' ब्राह्मणों को लाकर ही उनकी मूर्ति की प्रतिष्ठा करानी होगी, क्योंकि केवल वे ही सूर्य की पूजा के पूर्ण अधिकारी हैं।
मगॉ का निवास: गरुड़ पर सवार होकर साम्ब शाकद्वीप गए और वहां से १८ परिवारों को लेकर भारत आए। ये ब्राह्मण मगध और उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बस गए और 'शाकद्वीपीय ब्राह्मण' कहलाए।. मगध की विरासत और ऐतिहासिक महापुरुष - मगध (प्राचीन कीकट क्षेत्र) शाकद्वीपीय संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र बना। यहाँ के महापुरुषों ने ज्योतिष, नीति और साहित्य में विश्व का मार्गदर्शन किया। गयासुर: मगध के गया क्षेत्र का नाम इसी महान 'असुर' (जो स्वभाव से परम भक्त था) के नाम पर पड़ा। गयासुर की देह पर देवताओं ने यज्ञ किया, जिससे यह भूमि मोक्षदायिनी बनी। राजा उपरिचर वसु चंद्रवंशी राजा थे जिन्होंने मगध के गिरिव्रज (राजगीर) को अपनी राजधानी बनाया। इन्हें देवराज इंद्र से एक दिव्य विमान प्राप्त था। : चंद्रवंश की उत्पत्ति बुध और इला के मिलन से हुई। उनके पुत्र पुरुरवा (एल) ने 'प्रतिष्ठानपुर' से साम्राज्य विस्तार किया, जिसका प्रभाव मगध के जनपदों तक था। मगध की ज्योतिषीय परंपरा के स्तंभ। वराहमिहिर को विशेष रूप से शाकद्वीपीय परंपरा का प्रतिनिधि माना जाता है, जिन्होंने भारतीय ज्योतिष को सौर सिद्धांतों से पुष्ट किया। साहित्य में बाणभट्ट , मयूर भट्ट (मगध के निवासी) और नीति शास्त्र में कौटिल्य ने मगध के गौरव को वैश्विक पहचान दिलाई। वर्तमान में शाकद्वीप की पहचान और भौगोलिक समावेश - आधुनिक विद्वानों और इतिहासकारों (जैसे सर कनिंघम और राधाकुमुद मुखर्जी) के अनुसार, शाकद्वीप की पहचान मध्य एशिया (Scythia) और ईरान (Persia) से की जाती है।।प्राचीन काल में शाकद्वीपीय संस्कृति का प्रभाव केवल एक स्थान तक सीमित नहीं था। भारत के पूर्वी और उत्तरी हिस्से— बिहार (मगध, मिथिला, अंग, वज्जि), झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बंगाल और नेपाल—सौर उपासना और मग ब्राह्मणों के प्रभाव क्षेत्र रहे है । ऋग्वेद में वर्णित 'कीकट' ही बाद में मगध बना। यहाँ शाकद्वीपीय मघों के आगमन ने मूर्ति पूजा और मंदिर वास्तु (विशेषकर सूर्य मंदिर) को जन्म दिया। देव (औरंगाबाद), कोणार्क (ओडिशा) और दक्षिणार्क (गया) इसके साक्षात प्रमाण हैं।
शाकद्वीप केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि की सभ्यता का प्रतीक है, जिसने सौर ऊर्जा और ज्ञान को केंद्र में रखा। मगध की धरती पर मग ब्राह्मणों का आगमन भारतीय इतिहास की एक क्रांतिकारी घटना थी, जिसने आयुर्वेद, ज्योतिष और आध्यात्मिक चेतना को समृद्ध किया। आज भी मगध, अंग, वज्जि और मिथिला की सांस्कृतिक जड़ों में शाकद्वीप का अंश स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
संदर्भ: विष्णु पुराण, साम्ब पुराण, सूर्यपुराण , भविष्य पुराण, मगध की सांस्कृतिक विरासत