रविवार, जून 13, 2021

छिन्नमस्तिका शक्तिपीठ : सर्वार्थसिद्धि स्थल...

        भारतीय शाक्त सम्प्रदाय का शक्ति उपासना स्थल सिद्धि स्थल शक्ति पीठ है । देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण में शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण उल्लेख है । झारखंड राज्य का रामगढ़ जिले के रजरप्पा में स्थापित 'छिन्नमस्तिका' महाविद्यायों हैं। छिन्नमस्ता देवी के हाथ में अपना ही कटा हुआ सिर है तथा दूसरे हाथ में कटार है। कोलकाता के एक कालीपूजा मण्डप में छिन्नमस्ता का संबंध महाविद्या, देवी , निवासस्थान श्मशान अस्त्र खप्पर , जीवनसाथी भगवान शिव है ।
माता  छिन्नमस्ता महाविद्या सकल चिंताओं का अंत कर  कामना को पूरा करती हैं।  शक्ति स्वरूपा  छिन्न शीश के रूप में   अन्न के आगमन के रूप सिर के सन्धान से यज्ञ के रूप में प्रतिष्ठित है। जब सिर संधान रूप अन्न का आगमन बंद होगें   तब उस समय  छिन्नमस्ता  रह जाती है । छिन्नमस्ता महाविद्या का  ज्ञान कराने वाली महाविद्या भगवती त्रिपुरसुंदरी का  रौद्र रूप है।  शक्ति के विपरीत रति आलिंगन पर स्थित हैं। माता छिन्नमस्ता के  एक हाथ में खड्ग और दूसरे हाथ में मस्तक धारण किए हुए हैं। माता छिन्नमस्ता द्वारा  अपने कटे हुए स्कन्ध से रक्त की  धाराएं में एक को स्वयं पीती और  धाराओं से अपनी सहेली जया और विजया  की भूख को तृप्त कर रही हैं। इडा, पिंगला और सुषुम्ना नाडियों का संधान कर योग मार्ग में सिद्धि को प्रशस्त करती हैं। विद्यात्रयी में  दूसरी विद्या गिनी जाती हैं।
देवी के गले में हड्डियों की माला तथा कन्धे पर यज्ञोपवीत है। इसलिए शांत भाव से इनकी उपासना करने पर यह अपने शांत स्वरूप को प्रकट करती हैं। माता छिन्नमस्ता उग्र रूप में उपासना करने पर माता  उग्र रूप में दर्शन देती हैं जिससे साधक के उच्चाटन होने का भय रहता है। दिशाएं  वस्त्र ,  नाभि में योनि चक्र है। माता छिन्नमस्ता की उपासना का  मंत्र के चार लाख जप करने पर देवी सिद्ध होकर कृपा करती हैं। जप का दशांश हवन, हवन का दशांश तर्पण, तर्पण का दशांश मार्जन और मार्जन का दशांश ब्राह्मण और कन्या भोजन करना आवश्यक है ।
  छिन्नमस्तिका मंदिर वर्णन 'छिन्नमस्तिका मंदिर' झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह शक्तिपीठ होने के साथ-साथ पर्यटन का मुख्य केंद्र  है। स्थान रजरप्पा, झारखंड का रामगढ़ जिले के  भैरवी  नदी के किनारे रजरप्पा स्थित माता छिन्नमस्ता  छह हज़ार वर्ष पूर्व स्थापित है । देवी-देवता हज़ारों साल पहले राक्षसों एवं दैत्यों से मानव एवं देवता आतंकित थे। तब मानव माँ शक्ति को याद करने लगे। तब पार्वती (शक्ति) का 'छिन्नमस्तिका' के रूप में अवतरण हुआ। भौगोलिक स्थिति रांची से क़रीब 80 किलोमीटर की दूरी पर रजरप्पा में शक्तिपीठ आदिवासियों , जनजातियों में संथाली देवी छिन्नमस्तिका हैं।   भैरवी-भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर स्थित रजरप्पा की छिन्नमस्तिका मंदिर की उत्तरी दीवार के साथ रखे शिलाखंड पर दक्षिण की ओर मुख किए माता छिन्नमस्तिका के दिव्य स्वरूप का दर्शन होता है।  छिन्नमस्तिका मंदिर का निर्माण छह हज़ार वर्ष पहले हुआ था। मंदिर में आसपास प्राचीन ईंट,  मूर्ति एवं यज्ञ कुंड   नष्ट हो गए है । छह हज़ार वर्ष पूर्व मंदिर में माँ छिन्नमस्तिका की मूर्ति  स्वतः अनूदित हुई थी। छिन्नमस्तिका मंदिर का निर्माण वास्तुकला के गोलाकार गुम्बद की शिल्प कला असम वास्तुकलात्मक  शिल्प से मिलती है। मंदिर में एक  द्वार है। झारखण्ड राज्य का क्षेत्रों के ऐतिहासिक स्थलों में देवघर का   त्रिकुट ,  नंदन पहाड़  , नौलखा मंदिर , बैजू  , वासुकीनाथ ,  सत्संग आश्रम , वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग , बोकारो जवाहरलाल नेहरू बायोलॉजिकल पार्क ,  पारसनाथ पहाड़ी ,  इस्पात पुस्तकालय , स्टील प्लांट धनबाद चारक खुर्द , तोपचांची झील, पंचेत , पानर्रा ,  मैथन बाँध गिरिडीह उसरी झरना ,  खण्डोली , मधुबन जमशेदपुर कीनन स्‍टेडियम , जयंती सरोवर ,  जुबली पार्क ,  डिमना झील , दलमा वन्‍य अभ्‍यारण्‍य दुमका भुमका · मसनजोर बाँध · मलूटी रांची गोंडा हिल एण्ड रॉक गार्डन · मछलीघर-मूटा मगरमच्छ प्रजनन केन्द्र · मैकक्लुस्किगंज , हुंडरू जलप्रपात , सदनी जलप्रपात , हिरणी जलप्रपात , जगन्नाथपुर मन्दिर  , राँची झील ,  नक्षत्र वन ,  दसम जलप्रपात ,  जोन्हा जलप्रपात ,  टैगोर हिल ,  राजकीय संग्रहालय राँची , हज़ारीबाग़ कैनेरी पहाड़ी ,  राजरप्पा जलप्रपात , हज़ारीबाग़ अभयारण्य , हज़ारीबाग़ झील ,  रामगढ़ का 



राजरप्पा ,  छिन्नमस्तिका मंदिर , चतरा भदुली , कोल्हुआ पहाड़ी ,  कुण्ड गुफ़ा , तमासिन , द्वारी झरना , कौलेश्वरी देवी मन्दिर लातेहार , लोध जलप्रपात  पहाड़ी मंदिर रांची , जगन्नाथ मंदिर जगन्नाथपुर रांची ,  डिमना डैम जमशेदपुर , अंजना का हनुमानजी का जन्म स्थान गुमला  ,है । झारखंड के सांस्कृतिक विरासत रजरप्पा का शक्तिपीठ छिन्नमस्तिका है । बिहार का  मुजफ्फरपुर जिले  के कांटी में क्षिणनमस्तिके मंदिर है ।

शनिवार, जून 12, 2021

इन्द्राक्षी व महामाया शक्तिपीठ : सर्वमंगल स्थान...

        सनातन धर्म की शाक्त सम्प्रदाय की सांस्कृतिक विरासत भारतीय , श्रीलंकीय , तिब्बतीय शक्तिपीठों में समाहित है । शाक्त सम्प्रदाय में शक्ति की उपासना और तंत्र मंत्र , सिद्धि प्राप्त करने के लिए  शक्तिपीठों का निर्माण करने के लिये महत्वपूर्ण  भूमिका है । इन्द्राक्षी शक्तिपीठ , श्रीलंका - देवी भागवत पुराण , कालिकापुराण ,  शिवचरित्र ,  दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की  माता सती के शक्तिपीठों में श्री लंका की त्रिंकोमाली स्थित इन्द्राक्षी शक्तिपीठ तथा कोनेश्वरम मंदिर  का उल्लेख है ।महादेव शिवजी की पत्नी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं  करने के कारण  यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई। भगवान  शिव को  जब यह पता चला तब उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया था । भगवान शिवजअपनी पत्नी सती की जली हुई शव  लेकर विलाप करते हुए ब्रह्मांड में  घूमते रहे। जहां-जहां माता के अंग और आभूषण गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ निर्मित हो गए। पुरणों के  अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई है । श्रीलंका के  त्रिंकोमाली में माता की नूपुर  गिरने के कारण  त्रिंकोमाली में प्रसिद्ध त्रिकोणेश्वर मंदिर स्थित इंद्राक्षी शक्तिपीठ और राक्षसेश्वर भैरव की स्थापित हैं । सती के शरीर का पेट और जांघ के बीच का भाग का हिस्सा गिरा था ।   श्रीलंका का शंकरी शक्तिपीठ है।  शंकरी देवी मंदिर की स्थापना रावण ने की थी।  शिव मंदिर को  कोणेश्वरम   कोलंबो से 250 किमी दूर त्रिकोणमाली  की जगह पर चट्टान पर स्थित है। 
मानस शक्तिपीठ ,  तिब्बत - देवीपुराण के अनुसार  पर्वत 'भगवान शिव का सिंहासन' है। बौद्धों के लिए विशाल प्राकृतिक मण्डप और जैनियों के लिए ऋषभदेव का निर्वाण स्थल है। ममहामाया  शक्तियों का भण्डार मानते हैं। भौगोलिक दृष्टि से  चीन के अधीन महामाया स्थल  हिंदुओं, बौद्धों, जैनियों और तिब्बतियों के लिए अति-पुरातन तीर्थस्थान है। सती  देवी माँ का शक्तिपीठ चीन अधिकृत मानसरोवर के तट पर  सती की 'बायीं हथेली' का निपात हुआ था। महामाया  की शक्ति 'दाक्षायणी' तथा भैरव 'अमर' हैं। 'कैलास शक्तिपीठ' मानसरोवर का गौरवपूर्ण वर्णन हिन्दू, बौद्ध, जैन , शाक्त धर्म ग्रंथों में मिलता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार ब्रह्मा जी  के मन से निर्मित होने के कारण  'मानसरोवर' कहा गया। मानसरोवर पर  भगवान  शिव हंस रूप में विहार करते हैं। जैन धर्मग्रंथों में कैलास को 'अष्टपद' तथा मानसरोवर को 'पद्महद' कहा गया है।  सरोवर में तीर्थंकरों ने स्नान कर तपस्या की थी। बुद्ध के जन्म के साथ  मानसरोवर का घनिष्ट संबंध है। तिब्बती धर्मग्रंथ 'कंगरी करछक' में मानसरोवर की देवी 'दोर्जे फांग्मो' मानसरोवर को  निवास कहा गया है। भगवान देमचोर्ग, देवी फांग्मो के साथ नित्य विहार करते हैं।  मानसरोवर को 'त्सोमफम' कहते है । मानसरोवर के समीप  राक्षस ताल को  'रावण हृद'  कहते हैं। मानसरोवर का जल  नदी द्वारा राक्षस ताल तक जाता है। तिब्बती लोग  'लंगकत्सु' कहते हैं। जैन-ग्रंथों के अनुसार रावण  'अष्टपद' की यात्रा पर आया और उसने 'पद्महद' में स्नान करना चाहा, किंतु देवताओं ने उसे रोक दिया। तब उसने एक सरोवर, 'रावणहृद' का निर्माण किया और उसमें मानसरोवर की धारा प्रविहित कर स्नान किया था ।मानसे कुमुदा प्रोक्ता' के अनुसार मानसरोवर की शक्ति 'कुमुदा' हैं । तंत्र चूड़ामणि के अनुसार 'मानसे दक्षहस्तो में देवी दाक्षायणी हर। अमरो भैरवस्तत्र सर्वसिद्धि विधायकः॥ के अनुसार शक्ति 'दाक्षायणी' हैं ।  राम मनसा निर्मित परम्। ब्रह्मणा नरशार्दूल तेनेदं मानसं सरः॥(वाल्मीकि रामायण... 1/24/8-9) के अनुसार  वज्रवाराही ,  छबध्वनि राक्षस नदी , पद्महद , शक्तिपीठ अट्टहास शक्तिपीठ · अम्बाजी शक्तिपीठ · हरसिद्धि शक्तिपीठ · कन्याकुमारी शक्तिपीठ · करतोयाघाट शक्तिपीठ · करवीर शक्तिपीठ · कश्मीर शक्तिपीठ · कांची शक्तिपीठ · कात्यायनी पीठ · कामाख्या शक्तिपीठ · कालमाधव शक्तिपीठ · कालीघाट काली मंदिर · विशालाक्षी शक्तिपीठ · किरीट शक्तिपीठ · गण्डकी शक्तिपीठ · गुह्येश्वरी शक्तिपीठ · गोदावरी तट शक्तिपीठ · चट्टल शक्तिपीठ · जनस्थान शक्तिपीठ · जयंती शक्तिपीठ · जालंधर शक्तिपीठ · चिताभूमि · ज्वालामुखी शक्तिपीठ · त्रिपुर सुन्दरी शक्तिपीठ · त्रिस्तोता शक्तिपीठ · देवीकूप शक्तिपीठ · नन्दीपुर शक्तिपीठ · नलहाटी शक्तिपीठ · पंच सागर शक्तिपीठ · प्रयाग शक्तिपीठ · बहुला शक्तिपीठ · भैरवपर्वत शक्तिपीठ · मगध शक्तिपीठ · मणिवेदिका शक्तिपीठ · मानस शक्तिपीठ · पावागढ़ शक्तिपीठ · मिथिला शक्तिपीठ · यशोर शक्तिपीठ · युगाद्या शक्तिपीठ · रत्नावली शक्तिपीठ · रामगिरि शक्तिपीठ · लंका शक्तिपीठ · वक्त्रेश्वर शक्तिपीठ · विभाष शक्तिपीठ · विरजा शक्तिपीठ · विराट शक्तिपीठ · वैद्यनाथ का हार्द शक्तिपीठ · दुनागिरि शक्तिपीठ · शुचींद्रम शक्तिपीठ · शोण शक्तिपीठ · श्री पर्वत शक्तिपीठ · श्री शैल शक्तिपीठ · सुंगधा शक्तिपीठ · चामुंडा देवी मंदिर · माया देवी शक्तिपीठ · हिंगलाज शक्तिपीठ · उग्रतारा मंदिर है । विश्व की धरातल में भारत , नेपाल , तिब्बत , श्रीलंका , पाकिस्तान की धरती के बहु भाग में शक्ति की उपासना की जाती है ।