गुरुवार, जुलाई 21, 2022

गोरखपुर की सांस्कृतिक विरासत ...


    सनातन धर्म की नाथ सम्प्रदाय का उत्तरप्रदेश के पूर्वी एवं नेपाल सीमा के समीप गोरखपुर जिले का मुख्यालय गोरखपुर है । गोरखपुर ज़िले के  पूर्व में देवरिया एवं कुशीनगर ,  पश्चिम में संत कबीर नगर , उत्तर में महराजगंज एवं सिद्धार्थनगर , तथा दक्षिण में मऊ, आज़मगढ़ तथा अम्बेडकर नगर की सीमाओं से घिरा है । निर्देशांक: 26°45′49″N 83°24′14″E / 26.7637152°N 83.4039116°E के तहत 87.5 वर्गमील में फैले गोरखपुर महानगर  की आवादी 25 लाख लोग हिंदी , भोजपुरी तथा गोरखपुरी भाषी है । गोरखपुर सनातन धर्म के नाथ सम्प्रदाय , बौद्ध, हिन्दू, मुस्लिम, जैन और सिख सन्तों की साधनास्थली है।  मध्ययुगीन नाथ सम्प्रदाय के महान सन्त गोरखनाथ के नाम पर गोरखपुर रखा गया है ।  नाथ सम्प्रदाय की गोरखनाथ पीठ और  गोराखनाथ मन्दिर है। महान सन्त परमहंस योगानन्द का जन्म स्थान , राधाबाबा का साधना स्थल , बौद्ध मठ , , इमामबाड़ा, १८वीं सदी की दरगाह ,  गीता वाटिका एवं गीता प्रेस , 1930 में गोरखपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार विश्व का सर्वाधिक लम्बा प्लेटफॉर्म स्थित है।गोरखपुर जिले की  जनगणना 2011के अनुसार  जनसंख्या 4436275 आवादी 3483.8 वर्ग किमि क्षेत्रफल में निवास करते है। प्रसिद्ध तपस्वी सन्त एवं नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक मत्स्येन्द्रनाथ के प्रमुख शिष्य गोरखनाथ के नाम पर है । गोरखनाथ हठ योग का अभ्यास करने के लिये आत्म नियन्त्रण के विकास पर विशेष बल दिया करते थे और वर्षानुवर्ष एक ही मुद्रा में धूनी रमाये तपस्या किया करते थे। गोरखनाथ मन्दिर में धूनी की आग अनन्त काल से अनवरत सुलगती रहती  है । राप्ती और रोहिणी नदियों का संगम पर गोरखपुर  में क्षत्रिय गण संघ तथा मॉल सेन्ध्वार  का मुख्यालय था ।  छठी शताब्दी ई.पू. में गौतम बुद्ध ने सत्य की खोज के लिये जाने से पूर्व  राजसी वस्त्र त्याग दिये थे। मल्ल राज्य की राजधानी गोरखपुर  थी । इक्ष्वाकु राजवंश के बाद मगध पर  नंद राजवंश द्वारा चौथी सदी में विजय प्राप्त की उसके बाद गोरखपुर मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त और हर्ष साम्राज्यों का हिस्सा बन गया। भारत का महान सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जो मौर्य वंश का संस्थापाक का सम्बन्ध पिप्पलीवन के  प्राचीन गणराज्य से था। यह गणराज्य भी नेपाल की तराई और कसिया में रूपिनदेई के क्षेत्र गोरखपुर जिले में  था। 10 वीं सदी में थारू जाति के राजा मदन सिंह ने गोरखपुर क्षेत्र पर शासन किया। राजा विकास संकृत्यायन का जन्म स्थल है।
मध्यकाल  में, गोरखपुर को मध्यकालीन हिन्दू सन्त गोरक्षनाथ के नाम पर गोरखपुर नाम दिया गया था।  गोरक्षनाथ से महाभारत काल में युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ का निमन्त्रण देने भीम आए  थे।  गोरक्षनाथ  समाधिस्थ होने के कारण  भीम ने   दिनों तक विश्राम किया था। भीम की विशालकाय लेटी हुई प्रतिमा है। 12वीं सदी में, गोरखपुर क्षेत्र पर उत्तरी भारत के मुस्लिम शासक मुहम्मद गौरी ने विजय प्राप्त करने के  बाद गोरखपुर क्षेत्र कुतुबुद्दीन ऐबक और बहादुरशाह, शासकों के प्रभाव में  शताब्दियों के लिए बना था । 16वीं सदी के प्रारम्भ में भारत के एक रहस्यवादी कवि और प्रसिद्ध सन्त कबीर  रहते थे । 16 वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर ने साम्राज्य के पुनर्गठन  सरकार स्थापित कर  प्रशासनिक इकाइयों में अवध प्रान्त के  गोरखपुर  था । गोरखपुर 1803 में  ब्रिटिश नियन्त्रण में आया था । 1857 के विद्रोह के प्रमुख केंद्रों  में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभायी थी । गोरखपुर जिला चौरीचौरा की 4 फ़रवरी 1922 की घटना  भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुई है । प्रमुख क्रन्तिकारी नेता राम प्रसाद बिस्मिल' को गोरखपुर जेल में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भाग लेने के लिये फाँसी दे दी गयी। 19 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल की अन्त्येष्टि राजघाट  गोरखपुर के  राप्ती नदी के तट पर स्थित है। सन 1934 में यहाँ एक भूकम्प की तीव्रता 8.1 रिक्टर पैमाने पर से शहर में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ  था ।
प्राचीन काल में साधु-सन्त आश्रमों में विभिन्न भागों से आये लड़कों को योग व विद्यायें ग्रहण करते थे। त्रेता युग में  भगवान राम राम व  लक्ष्मण ने आश्रमों में रहकर योगादि शिक्षा ग्रहण की थी। पुरातात्विक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों को समेटे हुए है। भगवान बुद्ध, तीर्थकर महावीर, संत कबीर, गुरु गोरखनाथ की तपःस्थली, सर्वधर्म-सम्भाव के संदेश देने वाले विभिन्न धर्मावलम्बियों के देवालयों से परिपूर्ण गोरखपुर है । गोरखपुर रेलवे स्टेशन से 4 किलोमीटर पश्चिमोत्तर में स्थित नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक सिद्ध पुरूष श्री मत्स्येन्द्रनाथ  के शिष्य सिद्ध गुरु गोरखनाथ का गोराखनाथमन्दिर  स्थित है।  प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर 'खिचड़ी-मेला'आयोजित होते हसि । रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर की दूरी पर शाहपुर में विष्णु मंदिर स्थित है। विष्णु मंदिर के गर्भगृह में  12वीं शताब्दी की पालकालीन काले कसौटी पत्थर से निर्मित भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा स्थापित है। रेलवे स्टेशन से 4 किलोमीटर दूरी पर रेती चौक के पास स्थित गीताप्रेस में सफ़ेद संगमरमर की दीवारों पर श्रीमद्भगवदगीता के सम्पूर्ण 18 अध्याय के श्लोक उत्कीर्ण है। गीताप्रेस की दीवारों पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाओं की 'चित्रकला' प्रदर्शित हैं।  हिन्दू धर्म की पत्रिका कल्याण  , वेदों पुराणों धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन गीता प्रेस से किया जाता है। रेलवे स्टेशन से 9 किलोमीटर दूर गोरखपुर-कुशीनगर मार्ग पर प्राचीन बुढ़िया माई मंदिर के गर्भगृह में बुढ़िया माई  की मूर्ति  है ।गोरखपुर-पिपराइच मार्ग पर रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर दूरी पर  गीतावाटिका में राधा-कृष्ण  मन्दिर , आध्यत्मिक संत राधाबाबा मंदिर , गिरिराज परिक्रमा , नारद मंदिर ,  प्रख्यात समाजसेवी हनुमान प्रसाद पोद्दार उर्फ भाई जी का समाधि स्थल , भाई जी का आध्यात्मिक कक्ष है ।रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर दक्षिण में 1700 एकड़ के विस्तृत भू-भाग में रामगढ़ ताल स्थित है। गोरखपुर नगर के मध्य में रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर दूरी पर  इमामबाड़ा का निर्माण हज़रत बाबा रोशन अलीशाह की याद में सन्‌ 1717 ई० में नवाब आसफुद्दौला ने करवाया था । गोरखपुर शहर से 4 कि. मि. पर कूड़ाघाट बाज़ार के निकट  रामगढ़ ताल के पूर्वी भाग में झारखंडी शिव मंदिर स्थित है । उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरखनाथ मठ के पीठाधीश  माननीय योगी आदित्यनाथ का कर्म क्षेत्र गोरखपुर है ।

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