रविवार, नवंबर 29, 2020

किसान के प्रखर नेता पंडित यदुनंदन...


भारतीय किसान की समस्याओं और समाधान के लिए संघर्षशील नेता पंडित यदुनंदन शर्मा थे । भारतीय किसान नेता  और भारत के बिहार राज्य से राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के सशक्त व्यक्ति थे। उन्होंने रेरा सत्याग्रह के रूप में मनाए जाने वाले रेरा में जमींदारों और अंग्रेजों के खिलाफ टिलर के अधिकारों के लिए आंदोलन शुरू किया था। उनका जन्म माघ शुक्ल  वसंतपंचमी 1896 में अरवल जिले के सोनभद्र वंशी सूर्यपुर प्रखंड का मंझियावॉ में शाकद्वीपीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था।  टेकरी ज़मींदारी का हिस्सा मझियावॉ ग्राम  था। उनके पिता रामदेव शर्मा की मृत्यु होने के पश्चात  युवा होते हुए  चरवाहे के रूप में काम शुरू करना पड़ाथा । बचपन मे सुखल शर्मा के नाम से मझियावॉ मे रहते थे । पंडित यदुनंदन शर्मा ने  1914 में  बनारस में संस्क्टत का अध्ययन करने के बाद 1916 में टेकरी हाई स्कूल गया में नामांकन तथा 1919 में मैट्रिक किया और 1925 मे हिंदू विश्वविद्यालय बनारस मे नामांकन करने के बाद 1927 में आई . ए . और  1929 में वी. ए. डिग्री हासिल करने के बाद मझियावां गाँव के  स्कूल में एक साल के लिए शिक्षक बन गए थे । 1930 ई. में महात्मा गॉंधी के नमकसत्याग्रह में शामिल होकर गया जिला कॉग्रेस का नेत्टत्व , नमक प्रशिछण औरंगाबाद अनुमंडल के भगवान पुर में नमक बनाने के लिए  प्रारंभ किया गया ।  ब्रटिश सरकार ने पंडित यदुनंदन को ब्रिटिश सरकार के कार्यों के विरोध करने के कारण 16 माह की सजा दी गयी परंतु 1931 ई. डर्विन समझौते के करण 10 माह सजा काटने के बाद  पुन: 1932 तथा 1933  में 6-6 माह की सश्रम सजा काटने के बाद किसानोंकी समस्या तथा निष्पादन के लिए गया जिला का बेलागंज के समीप नेयामत पुर मे किसान आश्रम की स्थापना 1933 ई. मे की ।उन्होंने एक ज़मींदारी में एक प्रबंधक के रूप में भी काम किया, जिससे किसान प्रणाली का पहला ज्ञान प्राप्त हुआ। पंडित यदुनंदन शर्मा जेल से रिहा होने के बाद 1933 में किसान आंदोलन में शामिल हो गए और 1930 के दशक में प्रसिद्ध सदाको और रेरा सत्याग्रह शुरू किया। वह  मगध में किसानों के निर्विवाद नेता और महान स्वतंत्रता सेनानी और किसान नेता  बने। उनका अधिकांश जीवन नेयामतपुर गाँव में एक आश्रम में बीता जहाँ से वे ब्रिटिश शासन और जमींदारी के खिलाफ विद्रोह करते रहे। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किसान नेता पंडित यदुनंदन से किसान आश्रम में मिलने और स्थानीय लोगों के एक बड़े सम्मेलन को संबोधित करने के लिए दिसंबर में सर्द रात में 1936 में आश्रम का दौरा किया। 1933 ई. में जिला कॉग्रेस कमिटि गया के सचिव तथा बाद में अध्यछ  दो वर्षों तक रहे । 18 जून 1933 को बिहार प्रदेश किसान सम्मेलन के जॉच समिति के सद्स्य तथा 80 प्टष्ठ की रिपोर्ट तैयार कर किसानकी रूप कहानी पुस्तक प्रकाशित की तथा 20 सितंबर 1933 में गया डिस्ट्रिक कॉलेक्टर के सामने 60 हजार किसानों का प्रदर्शन का नेत्टत्व कर किसानों की समस्याओं का निराकरण किया । 5 अकटूबर 1934 मे गया के किसान सम्मेलन में होरही सभा में पंडित यदुनंदन के भाषण पर ब्रिटिश सरकार द्वारा रोक लगा दी ।1937 में बिहार मंत्रिमंडल बनने के बाद किसानों के लिए लडीाईयां कर बछवाडा में बिहार प्रदेश किसान सम्मेलन की सभा प्रदर्शन किया ।1938 में रेवडा ( वारसलीगंज ) के किसान सत्याग्रह का नेत्टत्व कर किसानों की समस्या का निष्पादन कराया था ।10 अप्रैल 1939 मे गया स्थित आजाद पार्क  में अखिल भारतीय किसान सभा का चतुर्थ अधिवेशन आयोजन किया गया जिसकी अध्यछता आचार्य नरेंद्रदेव तथा स्वागताध्यछ पंडित यदुनंदन शर्मा ने की।1939 में  अरवल , जहानाबाद , गया , औरंगाबाद , नवादा , नालंदा , पटना के मझियावॉ ,सतीस्थान ,फेसर ,घोसरवा , बेलागंज में किसान आंदोलन कर किसानों की सम्स्या का हक दिलाया । पं यदुनंदन शर्मा द्वारा 1940 ई. में किसानों की मूलभूत सुविधा दिलाने , ब्रिटिश सरकार के विरोध ,आजादी के लिए लंकादहन तथा चिनगारी पत्र प्रकाशित कया गया । 15 अगस्त 1947 में कॉग्रेस से सबंध विच्छेद कर किसानों के लिए संघर्षरत रहे है । बिहार डिस्ट्रीक गजेटियर गया 1957 के अनुसार डिस्ट्रिक्ट कॉग्रेस गया से सबंध विचछेद के बाद गया में कॉग्रेस सोसलिस्ट पार्टी तथा किसान सभा का उदय हुआ था । सोसलिस्ट तथा किसान सभा का आंदोलन में किसान कार्यकर्ता शामिल हुए ।किसान सभा का आंदोलनकारियों को जेल भेजा गया जिससे जहानाबाद ,नवादा ,गया के किसान आंदोलित हो गये । आंदोलन का नेत्टत्व स्वामी सहजानंद सरस्वती , पंडित यदुनंदन शर्मा ने की । 1939 ई. मे अखिल भारतीय किसान सभा का सेसन गया मे संपन्न हुआ जिसकी अधयछता आचार्य नर्ंद्रदेव ने की तथा जयप्काश नारायण को कॉग्रेस सोसलिस्ट पार्टी के नेता तथा अध्यछ  बने थे । 27 अप्रैल 1952 को गया  में पंडित यदुनंदन शर्मा द्वारा स्वतंत्रता सेनानी की समस्या तथा नदान के लिए  आयोजित किया गया । पंडित शर्मा ने  1952 के बिहार विधान सभा सदस्य के लिए जहनाबाद जिले के मखदुमपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गए। 03 मार्च 1975 ई. में किसान के प्रखर नेता पंडित यदुनंदन शर्मा नेयामतपुर किसान आश्रम में अंतिम सॉस निधन हो गया ।
   

                                        


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