रविवार, अक्तूबर 25, 2020

हिम का ऑचल हिमांचल..


भारतीय भू भाग आध्यात्मिक है । हिमांचल का स्थान दिव्यत्व तथा सर्वोपरि है । हिमांचल का राजा हिमवान महान तेजस्वी तथा सम्टद्धशाली है। हिमवान का स्थावर और जंगम प्रसिद्ध है ।हिमांचल का राजा हिमवान द्वारा स्थावर में हिमांचल की राजधानी स्थावर में  रत्न युकत महल का निर्माण कराया गया था । स्थावर देव ,सिद्ध , रीषि , मुनि का निवास तथा भगवान शिव का प्रिय  स्थल था । हिमांचल का राजा हिमवान का विवाह पितरों की मानसिक कन्या मेना के साथ हुई । पितरों की मानसिक कन्या स्वधा की पुत्री मेना , धन्या तथा कलावती को अयोनिजा कहलाती है । राजा हिमवान की भार्या भगवान विष्णु के अशंभूत मेना की पुत्री माता पर्वती का विवाह भगवान शिव के साथ हुई तथा पितरों की द्वितीय कन्या धन्या की विवाह मिथला का राजा मिथि के पुत्र जनक के साथ संपन्न हुआ था । राजा हिमवान की पुत्री  माता पर्वती के जन्मोत्सव पर भगवान विष्णु , ब्रह्मा सभी देव माता पर्वती की स्तुती करने लगे। शिव पुराण रूद्र संहिता के अनुसार हिमाचल की महत्वपूर्ण उलेख है। हिमांचल में माता शाकंभरी , कलावती  का प्रिय स्थल थी । हिमाचल प्रदेश मानव अस्तित्व और सिन्धु घाटी सभ्यता का विकासवाद की भू स्थल है।  हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में उत्खनन  में प्राप्त विरासत  हैं। प्राचीनकाल में दास, दस्यु और निषाद का निवास था । उन्नीसवीं शताब्दी में रणजीत सिंह ने हिमाचल  के अनेक भागों को अपने राज्य में मिला लिया। ब्रिटिस शासन के सहयोग से रणजीत सिंह द्वारा गोरखा लोगों को पराजित करके कुछ राजाओं की रियासतों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। हिमाचल प्रदेश राज्य “देव भूमि” पुकारा जाता था। हिमाचल प्रदेश की भूमि पूर्व ऐतिहासिक मानव अस्तित्व के गवाह हैं। हिमाचल प्रदेश के निवासियों ने  मध्य एशिया और भारतीय मैदानों पर निवास किया । हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने वाली प्रथम प्रजाति मंगोल और आर्यों द्वारा अनुसरित प्रोटो-ऑस्ट्रेलियड थी। प्रदेश में रहने वाले दस्युओं और निषादों और उनके शक्तिपूर्ण राजा शाम्बरा के अधीन 99 किले था, जिसका ऋग्वेद में उल्लेख है । प्राचीन काल से जनजातियों में कोइलियों, हालियों, डोग्रीयों, दास, खासों, किन्नरों और किरतों का निवास बना था । क्षेत्र पर आर्य-प्रभाव का उल्लेख ऋग्वेद में है। हिमाचल प्रदेश में जनपद की स्थापना और गणतंत्र था । मगध शासक मौर्यों के साथ अच्छा सम्बन्ध रखने के कारण हिमाचल प्रदेश  स्वतंत्र  जनपद रहा है । उत्तरीय गंगेतिक मैदानों में गुप्तों की उन्नति के साथ हिमाचल प्रदेश अपनी स्वतंत्रता खो दी। गुप्तों के पतन के बाद, असंख्य छोटे राज्यों ने इस पहाड़ी राज्य पर शासन किया और इसके विभिन्न प्रदेश में अपनी शक्ति को स्थापित किया। कश्मीर का राजा शंकर वर्मा ने 883 ई . में हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों पर प्रभाव जमाया। प्रदेश ने 1009 ईसा में महमूद गजनी के आक्रमण से त्रस्त था। मुगल शासकों ने हिमाचल भूमि की प्रशंसा के रूप में कला के असंख्य कार्यों को स्थापित किया ।1804 ई . में महाराजा रणजीत सिंह, जिन्होने यहां राजपूत शक्ति को नष्ट कर दिया, के द्वारा आक्रमण तक, 1773 ईसा में संसार चंद के नेतृत्व के अधीन राजपूतों ने इस प्रदेश को अपनाया। लगभग पूर्व 19 वीं शताब्दी ईसा में, ब्रिटिश ने अपने प्रभाव का प्रयोग किया और 1815-16 के गुरखा युद्ध के बाद शिमला के क्षेत्रों को मिला दिया। ब्रिटिश ने गर्मियों में अत्यधिक गर्मी और उत्तरी मैदानों की धूल से स्वयं को बचाने के लिये  प्रदेश में कई पहाडी स्टेशनों को स्थापित किया।  भारत के  गर्मी की राजधानी शिमला है ।1945 ई. तक प्रदेश  में प्रजा मंडलों का गठन हो चुका था। 1946 ई. में सभी प्रजा मंडलों का मुख्यालय मंडी में स्थापित किया गया।  1948 ई. में सोलन की नालागढ़ रियासत कों शामिल किया गया। अप्रैल 1948 में इस क्षेत्र की 27,018 वर्ग कि॰मी॰ में फैली लगभग 30 रियासतों को मिलाकर इस राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। उस समय हिमाचल प्रदेश में चार जिला महासू, सिरमौर, चंबा, मंडी शामिल किए गए थे। प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 27018 वर्ग किलोमीटर व जनसंया लगभग 9 लाख 35 हजार के करीब थी। 1950 ई. में प्रदेश के पुनर्गठन के अंतर्गत प्रदेश की सीमाओं का पुनर्गठन किया गया। कोटखाई को उपतहसील का दर्जा देकर खनेटी, दरकोटी, कुमारसैन उपतहसील के कुछ क्षेत्र तथा बलसन के कुछ क्षेत्र तथा बलसन के कुछ क्षेत्र कोटखाई में शामिल किए गए। कोटगढ़ को कुमारसैन उपतहसील में मिला गया। उत्तर प्रदेश के दो गांव संसोग और भटाड़ जो देवघर खत में थे उन्हें जुब्बल तहसील में शामिल कर दिया ।
 हिमाचल प्रदेश की स्थापना 25 जनवरी 1971 हुई तथा 12 जिलों को शामिल किया गया है । हिमाचल प्रदेश की राजधानी -शिमला हुई है ।नदियाॉ - रावी, ब्यास, चिनाब, सतलुज, यमुना ,वन एवं राष्ट्रीय उद्यान - पिन घाटी राष्ट्रीय उद्यान, ग्रेटर हिमालय नेशनल पार्क, रेणुका वन्यजीव अभयारण्य, चैल वन्यजीव अभयारण्य, कालाटोप खजियार वन्यजीव अभयारण्य ,भाषाएँ - हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, किन्नौरी, पहाड़ी, कांगड़ी और डोगरी, पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश ,राजकीय पशु हिम तेंदुए ,राजकीय पक्षी पश्चिमी ट्रागोपन ,राजकीय वृक्ष देवदार , राजकीय फूल गुलाबी बुरांस , विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 68 तथा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र 4 है । हिमाचल प्रदेश को देव भूमि भी कहा जाता है और यह उत्तर में जम्मू कश्मीर से, पश्चिम में पंजाब से, दक्षिण में उत्तर प्रदेश से और पूर्व में उत्तराखंड से घिरा है। हिमाचल शब्द का अर्थ ‘बर्फ का घर’ होता है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला है और राज्य का कुल क्षेत्रफल 55,673 वर्ग किमी. है। यह राज्य प्राकृतिक सुंदरता का खजाना है और विश्व के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। राज्य का ज्यादातर हिस्सा उंची पर्वत श्रृंखलाओं, गहरी घाटियों, सुंदर झरनों और हरियाली से भरा है। यहां का मौसम जगह के हिसाब से बदलता रहता है। कई  जगहों पर भारी बरसात होती है और कुछ जगहों पर बिलकुल वर्षा नहीं होती। उंचाई पर स्थित होने के कारण इस राज्य में बर्फबारी आम बात है। राज्य में 12 जिले हैं जो प्रशासनिक सुविधा के लिए मंडलों, गांवों और कस्बों में  है। हिमाचल में सेव उत्पादन के कारण हिमाचल प्रदेश को ‘सेब का राज्य’  कहा जाता है। मानव सभ्यता  की शुरुआत  विभिन्न कालों में राजाओं के वंशज द्वारा किया गया  हैं।  सिंधु घाटी सभ्यता के लोग अपनी अराध्यय भगवान शिव तथा आराध्हांया माता पार्वती के उपासक  रहे। तीसरी सहस्त्राब्दी ई.  पू.  सिंधु वासी  लोग गंगा के मैदानों से यहां शांतिपूर्ण जीवन की खोज में आए थे। जल्द ही मंगोलियों ने क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और फिर आर्य आए। भारतीय महाकाव्य के अनुसार, हिमाचल प्रदेश कई छोटे जनपदों और गणराज्यों का समूह था जिसके हर राज्य की एक सांस्कृतिक इकाई बनी थी।  मुगल  राजा महमूद गजनवी, सिकंदर आदि थे। इन लोगों ने  क्षेत्र को जीता वर्चस्व स्थापित किया। मुगल  शासन का पतन होने के बाद गोरखाओं ने इस भूमि पर कब्जा कर लिया।  एंग्लो-गोरखा युद्ध के दौरान गोरखा की हार के बाद  अंग्रेजों के हाथों आ गयी । अंग्रेज इस राज्य की खूबसूरती के कायल हो गए। ब्रटिश शासक  सन् 1854 से 1914 तक राज किया। सन् 1948 में 30 रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश का गठन किया गया।  सन् 1971 में हिमाचल प्रदेश भारतीय संघ का 18वां राज्य बना है ।पश्चिमी हिमाचल की तलहटी में स्थित होने के कारण हिमाचल प्रदेश समुद्र तल से 6500 मीटर की उंचाई पर है। इसकी उंचाई पश्चिम से पूर्व और उत्तर से दक्षिण की ओर है। भौगोलिक तौर पर यह क्षेत्र तीन श्रेणियों में बंटा हैः बाहरी हिमालय यानि शिवालिक, भीतरी हिमालय यानि सेंट्रल ज़ोन और ग्रेटर हिमालय यानि अल्पाइन ज़ोन। हिमाचल प्रदेश अपनी फैली हुई घाटियों, बर्फ से ढंके पहाड़ों, खूबसूरत झीलों और नदियों और इठलाते झरनों के लिए प्रसिद्ध है। राज्य का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा जंगलों से ढंका है जिसमें देवदार के जंगल, बान ओक वन, शंकुधारी जंगल, अल्पाइन चराइ, रुखे पतझड़ी जंगल और बुरुंश के जंगल शामिल हैं। यहां की जलवायु अत्यधिक ठंडी से सेमी ट्रापीकल है।यहां की गर्मियां अप्रैल से जून तक रहती हैं, जिसमें मौसम काफी सुहावना रहता है और भारी बर्फबारी की वजह से सर्दियां अत्यधिक ठंडी रहती हैं। बरसात का मौसम यहां की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है। यह मौसम जुलाई से सितंबर तक रहता है। बरसात में नदियां और झरने फिर से भर जाते हैं और हरियाली साल भर देखी जा सकती है। यहां की मुख्य नदियां चंद्र भागा, ब्यास, चिनाब, सतलज और रावी हैं। यह नदियां साल भर बहती हैं और मुख्य तौर पर पर्वतों के ग्लेशियर से पलती हैं। हिमाचल प्रदेश के कुछ ग्लेशियर बारा शिरी, भागा, चंद्रा हैं। राज्य 12 जिला , 75 तहसीलों, 52 उपमंडलों, 75 ब्लाॅक और 20,000 से ज्यादा गांवों और 57 कस्बों में बंटा है।आजादी के बाद गठन होने के कारण हिमाचल प्रदेश की विधानसभा का कोई पूर्व संविधान नहीं है। राज्य की एक सदनीय विधायिका में विधानसभा में 68 सीट और चार लोक सभा क्षेत्र तथा तीन सीटे  राज्य सभा की हैं। 
 हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में से एक है जिसने खुद को सबसे पिछड़े राज्य से सबसे उन्नत राज्य में तब्दील किया है। राज्य की 50 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। कृषि यहां के लोगों की आय का प्राथमिक स्रोत है। राज्य की महत्वपूर्ण फसलों में चावल, जौ, मक्का और गेंहू शामिल है। हिमालय की गोद में बसा होने के कारण हिमाचल की भूमि उपजाउ है और फलों की खेती के लिए अनुकूल है। सेब की खेती से राज्य को हर साल 300 करोड़ रुपये की आय होती है। यहां खेती किये जाने वाले अन्य फलों में अंजीर, जैतून, हाॅप, नट्स, मशरुम, केसर और शारदा खरबूज हैं। सहायक बागवानी के तौर पर यहां शहद और फूल भी पैदा होता है। स्थानीय निवासियों के लिए पर्यटन आय का अच्छा स्रोत है और राज्य की अर्थव्यवस्था में सहायक है। बिजली की प्रचुरता के कारण यहां कई लघु उद्योगों की स्थापना हुई है। यहां के प्रदूषण रहित वातावरण के कारण राज्य में कई इलेक्ट्राॅनिक परिसर भी स्थापित हुए हंै। इसकी वजह से राज्य का आर्थिक विकास तेजी से हुआ है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश की कुल जनसंख्या 68,64,602 है जो कि देश की आबादी का बहुत छोटा हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में से है जिसमें हिंदुओं की जनसंख्या सबसे अधिक है। यहां करीब 90 प्रतिशत हिंदू हैं। इनमें भी मुख्य समुदाय राजपूत है जो कि बहुत पहले यहां आकर बस गए थे। ब्राम्हण और राठी भी राज्य की आबादी का मुख्य हिस्सा हैं। घीर्थ समुदाय या चैधरी समुदाय ज्यादातर कांगड़ा जिले में बसता है। यह लोग अक्सर जमीन के मालिक होते हैं जो अपनी भूमि गरीब किसानों को खेती के लिए किराये पर देते हैं और उनसे पैसे लेते हैं। अन्य समुदायों में कन्नेत, कोली, गड्डी, गुज्जर, लाहौली और पंगवाल हैं। राज्य के ग्रामीण भाग में मजबूत जाति व्यवस्था है लेकिन आधुनिकता आने के साथ स्थितियां बदल रही हैं। हिमाचल प्रदेश में तिब्बतियों की भी अच्छी खासी आबादी है और हिंदू धर्म के बाद बौद्ध धर्म दूसरा प्रमुख धर्म है। तिब्बत के शरणार्थी होेने के कारण यह ज्यादातर सामूहिक रुप से लाहौल और किन्नौर में रहते हैं। राज्य की सीमा पंजाब से बंटी होने के कारण सिख समुदाय के लोग भी शहरों और कस्बों में रहते हैं। मुसलमानों की संख्या राज्य में कम है। हिमाचल की खूबसूरती और विविधता के कारण निश्चित तौर पर हिमाचल प्रदेश यात्रा करने का सबसे अच्छा स्थान है। बर्फ से ढंके पहाड़ों, हरे भरे जंगलों, लाल सेब के बागों और ताजा शुद्ध हवा के कारण राज्य में वह सब कुछ है जिसकी वजह से दुनिया भर के लोग इसकी ओर खिंचे चले आते हैं। शिमला, मनाली, चंबा आदि ऐसी जगहें हैं जहां सालभर दंपत्ति हनीमून मनाने आते हैं। इसके अलावा लोग यहां पहाड़ों के रोमांच, रिवर राफ्टिंग, आईस स्केटिंग, पैरा ग्लाईडिंग और स्किइंग के मजे करने या फिर शांतिपूर्ण छुट्टी बिताने आते हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां मंदिर, चर्च, मठ, नदियां, हिल स्टेशन, वास्तुकला के नमूने और बाजार हैं। धर्मशाला यहां का सबसे ठंडा हिल स्टेशन है। धर्मशाला में बर्फीली घाटियां, वनस्पति, जीव और ताजगी हैं जो प्रकृति की देन हैं। शिमला में पर्यटक जाखू पहाड़ी, रिज, लक्कर बाजार, सेंट माइकल कैथेड्रल, राज्य संग्रहालय का मजा ले सकते हैं या फिर माॅल रोड पर तफरीह कर सकते हैं। मशोरबा, कुफरी, फागु कुछ ऐसे उपनगर हैं जो राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती का मनमोहक नजारा देते हैं। कुल्लू, चैल, कसौली, मणीकर्ण, डलहौजी आदि हिमाचल प्रदेश की घूमने लायक जगहें हैं। हिमाचल प्रदेश एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राज्य है। क्योंकि प्राचीन समय से ही यहां कई नस्ले आकर बसती गईं थीं इसलिए हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत बहुत विविध, रंगीन और समृद्ध है। इसका प्रदर्शन यहां के रंगीन कपड़ों, मीठे संगीत, त्यौहार के उत्सव, लयबद्ध नृत्य और सरल लेकिन समृद्ध जीवनशैली में होता है। कला और हस्तशिल्प यहां की संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। राज्य की विशेषता पश्मिना शाॅल तैयार करना है जो कि नियमित तौर पर विदेशों में निर्यात की जाती है। इसके अलावा लकड़ी के बर्तन, धातु के आभूषण, बर्तन भी स्थानीय लोगों के द्वारा बनाए जाते हैं। संगीत और नृत्य हिमाचलियों के जीवन का खास हिस्सा है। देवी-देवताओं के आव्हान के लिए अक्सर लोक गीत गाए जाते हैं। यहां के लोगों के बीच भारतीय रागों पर आधारित विशेष गाने जिन्हें संस्कार गीत कहा जाता है, लोकप्रिय हैं। राज्य की विशेष नृत्य शैलियां शोना, घी, बुराह, लोसर, नाटी आदि हैं। यहां त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। हर साल धर्मशाला में अंतर्राष्ट्रीय हिमालय फेस्टिवल मनाया जाता है। यहां के स्थानीय त्यौहारों में लाहौलियों के चीशु और लाहौल और कांगड़ा जिले का त्यौहार हरियाली है जो कि बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए राष्ट्रीय त्यौहार जैसे दीपावली, लोहड़ी, बैसाखी और क्रिसमस भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर भारत का राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश में सभी के द्वारा हिंदी भाषा है। दूसरी बोली जाने वाली भाषा पहाड़ी  भषा संस्कृत और प्राकृत से बनी है। पहाडी भाषा का  तीन रुप हैं - उत्तरी पहाड़ी, पश्चिमी पहाड़ी और पूर्वी पहाड़ी। इस में से दूसरा रुप हिमाचल प्रदेश के लोगों ने अपनाया है और इसे विभिन्न बोलियों में बोलते हैं। हिमाचल प्रदेश में बोली जाने वाली पहाडि़यों के कुछ रुप चुराही, हिमाचली, मंडेली, कुलुही आदि हैं। पंजाब से राज्य की करीबी के कारण पंजाबी भी राज्य की लोकप्रिय भाषा है। क्षेत्रीय लोगों द्वारा कांगड़ी, डोगरी, किन्नौरी  बोली जाती है। यहां आकर बसे तिब्बती लोग तिब्बती भाषा में ही बात करना पसंद करते हैं।  मारवाड़ी, गुजराती, बिहारी, बंगाली भाषाएं हैं। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर , चंबा ,हमीरपुर ,कांगड़ा , किन्नौर , कुल्लू ,लाहौल और स्पीती ,मंडी , शिमला , सिरमौर ,सोला  और  उना जिले हैं। 
 सातवां मनु वैवस्वत काल मे हिमाचल का राजा हिमवान हुए तथा शैव ,शाक्त , वैष्णव तथा सौर धर्म के उपासक और प्रक्टति पूजक है।

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